मनुज's image
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दुविधा का समक्ष उपस्थित डेरा

जब सिमटता सुविधा का घेरा!

कष्ट की धूप अक्सर लेते सेक,

बेशक, मंशा आपकी होती नेक!

कुंठा के कारण का भी होगा अंत,

अंतर्द्वद साधारण मनुष्य हो या संत!

फिर भ्रम की समाप्ति के पश्चात,

दीजिए द्वेष के पनपने को मात!

क्यूंकि पढ़ा होगा आपने कई बार,

हुआ आपको पहले भी साक्षात्कार!

सामाजिक पृष्ठभूमि के कई आयाम,

तभी सजगता है मनुज को पैग़ाम!

क्रोध की ज्वाला भीतर ना दहकती

जब करुणा अवचेतन में महकती!

और मुक्कदर पर जब भी हो संवाद!

अपनी क्षमता का ना करना उपवाद,

भीतर प्रेरणा की ये जो लहर बरकरार,

कर्तव्य के पालन की उसे सदा दरकार!

अपनी ज़िम्मेदारियों का प्रभावी चुनाव,

चाहे रहा हो अस्थाई आकर्षण से लगाव!

विचलित ना होता सही-गलत से विवेक,

पहलुओं को समझना सरलता से प्रत्येक!

कभी अनुभवों को अपने पुराने सींच,

आत्मावलोकन से बारीक रेखा को खींच,

चरित्र में अपने जोड़ते रहिएगा विशेषता,

अनुशासन से उभरेगी आपकी अचल श्रेष्ठता।


- यति



Move by Discipline!



❤️



More Love and Light to y'all!






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