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ज़ुल्म-ए-ज़माना,

गफलत का ये कैसा कारनामा,

सबा में आज रुआसी,

आलम में भी छाई उदासी!



कितनी यहां पर हैं नुमाइश!

कद्र की फिर कहां गुंजाइश?

जज़्बातों का हो एहतराम,

वो भी तो आखिर हस्सास!



ये जो हमारा इश्क़ हैं ना,

लगता मुझे बेहिसाब,

ये ही तो लगता फिंरोंज़ॉ,

ये ही तो लगता अफ़स़ूॅ!




करवटें बदलते,

सोचा मैं सुलझा लूंगी

मन जो हैं गर मुझसे खफा,

तसलसुल थी पर विचारों की दौड़,





कैसा था ये कोलाहल,

इज़्तिराब और शोर,

मैं तब्दील हो बन चुकी

थी नटखट चकोर!




जिसको बस इतनी तड़प

की उनकी मुसरत को

कभी कष्ट ना पाए हड़प,

इक़रार होकर हौले से टूटे हबाब!




- यति





हस्सास- संवेदनशील- Senstive

फिंरोंज़ॉ- चमकदार- Luminous

अफ़स़ूॅ -जादुई -Magical

तसलसुल- निरंतर - Continuity

इज़्तिराब- व्याकुलता- Restless

इक़रार -स्वीकारोक्ति- Agreeing

मुसरत - सुख/ आनंद - Delight

हबाब -बुलबुला -Bubble

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