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आज सुनाती हूं आप सबको रात्रि भोज की कथा!

लीजिए! जानिए परिवार के सदस्यों की मज़ेदार व्यथा,


कुर्सी पर बैठी हैं छुटकी,

लेती हैं अपने बड़े भाई की चुटकी,

खींचती हैं सबकी बहुत टांग,

उधर बड़ी बहू की सीधी मांग!

खाने से पहले करें सब प्रार्थना,

ऐसी अटूट हैं भई उसकी आराधना!

बड़ा बेटा कभी यूंही बेवजह झगड़ालू,

खाने में हर सब्ज़ी में ढूंढता बस आलू,

सबको पसंद खाने पर चर्चा,

बड़ी मां को नहीं पसंद पर अनर्थक खर्चा,

मेज़ पर सब बैठे संग,

सबका लेकिन अपना - अपना ढंग!

आदतें सबकी अलग थलग,

फिर भी बैठे एक दूजे के अगल बगल,

यही तो हैं परिवार के होने का सार!

कम न होता एक दूजे के प्रति प्यार,

कोई बाहर देश में करता व्यापार,

तो कोई देख रहा अपने सपने सच होने के आसार,

यूं तो नहीं कोई किसी बंधन का आसक्त,

किंतु ना संभव किसी की जगह कोई अतिरिक्त,

यहां बातें होती थोड़ी रोज़,

इसलिए न पनपता रिश्तों में ज़रा भी बोझ।।


- यति


जी हां , थोड़ी हलचल ✨महफूज़ रखिए :)

❤️

अपनों का हालचाल जानना सुखद हैं।।

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