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।। भारत और बदलाव ।।

Yati Vandana TripathiYati Vandana Tripathi November 17, 2021
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क्या खूब हैं ये चाव!

बदलाव का गहरा बहाव,

पश्चिमीकरण से जो ना कतराया!

वो अक्सर अस्तित्व को लेकर घबराया!

कितना फिर हम समझे स्वराज?

कितना मुमकिन हैं सुधारना अपना समाज?

कहां से करूं संपूर्ण संपदा का विस्तार!

भारत से ही तो शुरू हुआ वस्त्रों का व्यापार,

जूट उत्पादन में मिला पहला स्थान!

उपजाऊ धरती की प्राप्त हमें शान,

अनेक हुए अमर निज होकर कुर्बान!

भारत की सुधा से विश्व में बढ़ा ज्ञान,

नौवहन में उपग्रह भारत के दर्ज,

संपदा सुरक्षित रखने में कैसा हर्ज़?

बहुत खूब हैं माना बदलाव का चाव,

समुद्र में पहल करती मैं नहीं एक नाव!

मैं हर बूंद संग मिलकर बहती हुई धार,

रखती यकीन की होगा समस्त जन का उद्धार,

क्षीण पत्रकारिता पर मीडिया लगाए जो प्रतिबंध,

घनिष्ठ हो अभिव्यक्ति संग उसका असल में संबंध,

तो जागृति के माध्यम से होगा संसाधनों का प्रबंध!

हमारी धरोहर में व्याप्त आध्यात्म की सौंधी सुगंध।



- यति



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