बेनक़ाब's image
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लगा रहे तुम समय का हिसाब?

कितना तुममें जुनून जीतने को खिताब?

क्या अक्सर पाने सपना रहते तुम बेताब?

क्या भरा तुम्हारे भीतर भी दर्द का सैलाब?

क्यों ना बना लो तुम दोस्त एक नई किताब!

हो जाओ तुम भी मुक्त फिर होकर बेनक़ाब!

करलो खुदके मन की तुम सुकून संग बेहिसाब!

यही तो मन के कोनों को रखेगा भाव से शादाब!

कुछ अनोखा लाओगे फिर तुम अपने स्वभाव!

कुछ नया जगाओं चेतना में की ओझिल हो अभाव!

भांपलों हकीकत, करलो हौले से सत्य का चुनाव!

ये वक्त भी हैं बस केवल ज़िंदगी का एक पढ़ाव!

पहुंचे ना कष्ट किसी को बना लो दूरी उतनी नाप!

नष्ट ना होने पाएं प्रेम दिलों से छोड़ो ऐसी छाप!

लाड़ तुमको मिल गया प्रभु का करके निश्छल जाप!

मेहनत से सुख पाता देखो हृदय कैसे अपनेआप!

आज इतना ही स्याही को पेश करना हृदय का आघात,

अभिव्यक्त करने से मन की स्थिति ना होती आपात!

मंथन करके हो जाती फैसलों की फितरत मुझे ज्ञात!

हौसलों को जिंदगी का रुतबा ना देने पाता देखो मात!




- यति





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