आशंका ✨'s image
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गहन थी आशंका,

वो दिन फिर आएगा

ओझिल होती उम्मीद को

फिर वो शख़्स भर पाएगा


सोचा किसी शख़्स से

फिर क्यूं आकांक्षा जोड़ी जाएं?

वादों के दरमियां भावों को

क्यूं इतना सताया जाएं?


चंद मिनटों का था वो दुमूहर्त,

जब हुआ होगा ये फरेब़,

कौड़ी के दाम लगाया सारा,

हृदय की निधि का भी टूटा एब!


अब फक्त किस्से हम सुनाते!

खुदको भूलने कहते वो वाक्या

जिसमें कीमत ना थी प्रेम की,

जिसमें विवेक को था बहकाया!


अब न्याय किससे मांगेगे?

हम खुद ही तो समझे ऊर्जा को मुफ्त,

तभी निवेश कर गए उसका खूब,

कितना समय के "सदुपयोग" से उठाया लुत्फ?


अब संसार में हर वस्तु जो महंगी

वो आती नहीं केवल शोहरत से!

कुछ अनुभव होते अभिन्न और अतरंगी,

दे जाते जो मोहलत और सहूलियत बेहिसाब।


- यति


All we got is time ! ❤️




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