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अर्ज़ किया हैं!

Yati Vandana TripathiYati Vandana Tripathi August 31, 2021
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कुछ बातें ख़ामोशी में भी कह दी जाती हैं,

कुछ यादें तो ख्वाइशों के बिना भी सजीव रहती हैं।



ऐसी ही यादों , बातों और इरादों के नाम पेश हैं चंद अल्फाज़ो वाले कुछ छंद!


आशा करती हूं आपको पसंद आएं! :)

साथ ही टिप्पणी कर सुधार के बिंदु बतलाएं,

बताएं ये भी की आपको मेरे लेखन में क्या कुछ लुभाएं!


तो प्रस्तुत हैं :



सख़्ती


क्या सख़्त होने से कम होती तकलीफ?

अगर कर देते तनिक सच्ची सी तारीफ़!

तो अतीत का कोहरा धुंधला पड़ जाता,

अंदर का टूटा बिखरा सब सिमट जाता।



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सुकून



जब लबों पर उनकी मैंने गुमान देखा,

तो जाना ज़रूरी हो गई खींचनी इक रेखा!

बेशक मोहसिन कम नहीं थे हम पर,

फिर भी शर्त ना रखते वो जो जान छिड़कते हम पर।


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संभावना



शागिर्द हम बन बैठते अगर वो मनाना जान जाते,

काश! कुछ रिश्ते खुदके संभलने से संभाल लिए जाते!

वो कहते हैं बहुत लोग हैं उनके करीब,

काश! जान पाते हमें भी संग रखने की तरकीब।





- यति




शुक्रिया ❤️














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