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आंतरिक शांति :)

Yati Vandana TripathiYati Vandana Tripathi September 27, 2021
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सौहार्द जब हो स्वभाव में,

मरहम बनती दया घाव में!

प्रकृति मां का संतुलन कमाल!

स्वतंत्रता देने पर ना हो उसे मलाल,

वो अनंत प्रेम सदैव बरसाती,

फिर कद्र न होने पर तरसाती,

रोज़मर्या में कागज़ों का ना हो दुरुपयोग,

ऊर्जा क्षय करने से बचे जब ना उसका उपयोग!

जल को कम खर्च करने के हो प्रयोग,

स्वस्थ रहने हेतु जारी रहे योग,

ना हो गैर ज़रूरी खानपान का भोग,

सरल प्रयासों से मुमकिन रहना निरोग,

जंगल,जल और जीवन का संरक्षण,

एहतियात बरतें इससे पहले आए नौबत भीषण!

आने वाली पीढ़ी को मिले सही उदाहरण,

याद रहे उनके प्रति रहना सजग हर क्षण,

प्रकृति मां रक्षा जानती भली भांति,

उसके प्रति कृतज्ञ रहने से मिलती आंतरिक शांति!


-यति



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