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दो गज की दूरी

digvijdigvij June 25, 2022
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दरवाजे खुले
यकायक आ गयी वो सामने
नज़रे मिली
मैं ठिठका
वो सहमी
मैं उठा
वो बैठ गयी
वो हंसी मास्क के अंदर से
मैं भी मुस्कुराया मास्क के अंदर से
उसने हाथ बढ़ाया
मैंने भी थामने को अपना हाथ उठाया
नही नही
वो बोली
सामने वाली
सीट है खाली
दरवाजे खुले फिर से
उमड़ पड़ा एक सैलाब
इक अधेड़ लहर आ गयी इस तरफ
वो उठी और किनारे आ लगी
अब वो थी
मैं था
और हमारे बीच
दो गज की दूरी

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