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"नीरवता"

एक कविता है 

नीरवता

बिन शब्दों के जीती जागती 

एक पूर्ण कविता है

बहती हुई यह नितांत नीरवता


आओ सुनों खामोशियां !

शब्द लाज़मी नही है 

कविता के लिए  

          - फाल्गुनी रॉय


2019, गुड़गांव

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