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हाथ फैलाए या मर जाये बोलो,

आबरूदार किधर जाये बोलो ?


हर कोई तन्हा हर कोई अकेला है,

भीड़ ही भीड़ है जिधर जाए बोलो।


पेट खाली और बदन अधनंग है,

रात को खाए या ठिठुर जाए बोलो।


रोज़ वादे, बस कुछ और वादे,

क्या समेटे, क्या लेकर घर जाए बोलो।


जहां भी जाएं हालात बेमुनासिब है,

लड़े जहांसे या खुद से हार जाए बोलो।



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