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"सिखलाने से नहीं आती फकीरी की अदा सारी" - विवेक मिश्र

विवेक मिश्रविवेक मिश्र March 7, 2022
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सिखाने से नहीं आती, फकीरी की अदा सारी |

ये रहमत छीन लेती है, जमाने भर की सब यारी ||


हर लम्हा एक कतरा है, हर कतरा भी तो लम्हा है | 

कतराने की मोहब्बत में लम्हे ने ज़िन्दगी हारी ||


चुप बैठोगे तो इल्जामों का करे सौदा बन व्यापारी |

बोलने पर भी तो पागल का करता है फतवा जारी ||


जीवन का मोल पहचाने वक़्त की है समझदारी |

ये दुनिया चार दिन की है व् रातें मुफ्त बेचारी || 


वो ऐसा है, ये वैसा है, पास उसके तो पैसा है |

सब कुछ छूट जाता है, धरी रह जाती खुद्दारी ||


क्या बोओगे, कब सोओगे , मानो सबको खोओगे |

हार पे जीत की ज़िद कर भी हारो जीत भरी पारी ||


ये करना है, न डरना है कि सोचो अब तो मरना है |

लिखे हर श्वांस का लेखा सदा उसकी कलमकारी || 


सिखाने से नहीं आती फ़कीरी की अदा सारी ......

ये रहमत छीन लेती है ज़माने भर की सब यारी ...||

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