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अभी जल ही तो हो तुम, बनोगे सैलाब तुम भी,


आसमान-अम्बुद में हो तो मेह कण (बूंद), बहे तो प्रवाहिनी रेवा हो तुम भी।


ठहरे तो तालाब, सिंधूर्मी सा फन उठाया तो कभी सुनामी- कभी सैलाब हो तुम भी।


परिवर्तन सुनिश्चित है, जैसे सुनिश्चित है अमावस का ज्वार।

बस हो सदा समय संग लय-गति-लक्ष्य समन्वित भी,


अभी जल ही तो हो तुम बनोगे सैलाब तुम भी, बनोगे सैलाब तुम भी। #timeforchange .Vivek✍️ विवेकाधिकार।

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