इबारत's image
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हर एक वर्क में एक नया गम मिलेगा,
पढ़ने से समझ आए ऐसी इबारत नहीं मेरी।
लहू रमाया है स्याही की जगह, जो अब सूख चुका है।
तेरी यादें पैबस्त है नसों में मेरी ।।।

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