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चलो मर जाते हैं

Vivek Kumar TiwariVivek Kumar Tiwari February 17, 2022
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चलो मर जाते है की अब बोझ ढोया नहीं जाता
सरेआम बेतरतीबी से बेइज्जत होना ढोया नहीं जाता
अभी तक तुम्हारे उंगलियों के निशान मेरे गालों पर है 
बीच बाजार किसी अपने से थप्पड़ खाना ढोया नहीं जाता
तुमने मेरा साथ छोड़ दिया इसमें मैं कहा गलत हूं
उन यादों को हर रात जीना ढोया नहीं जाता
तुम कहती हो की तुम्हे सपने में भी याद ना करू 
ये कैसे होगा 
मैं तुम्हारे टूटे सपनों के लिए जिम्मेदार हूं ये बोझ अब ढोया नहीं जाता
की चलो मर जाते है की अब ये बोझ ढोया नहीं जाता

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