जारी है... (गज़ल)'s image
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                                   जारी है...

"माना कि यह कोलाहल है ज़हर के लिए,
लेकिन अच्छा है कि बगावत का कहर जारी है...

लोग तो यूं भौंहें सिकोड़े बैठें हैं किसी को लेकर,
कुछ तो बात होगी तभी सफर जारी है...

किस कलेवर से कहूं कितने लब्जों को चुनूं,
कर खुद पे यकीं कि ज़फ़र जारी है...

बेवक्त खयालों में पल गुजर ही गए,
मुझे मालूम है कि करवटों में पहर जारी है...

ये चीखें ये आहटें कहीं चुप-चाप सी हैं,
सन्नाटों में रहने की खबर ज़ारी है...

जां की कीमत नहीं जहां में यदि रहने पर,
फुरसत से ही जाने में ठहर, जारी है...

यकीनन ही सो गए सारे तर्ज़ -ए - हुकूमत यूंही,
बागों को कब्रों में बदलने की लहर जारी है...

उठ गई ये कलम तो हां खिलाफत होगी,
तख्त ताज को हिलाने में बहर जारी है..."
- विष्णुकांत चतुर्वेदी

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