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ढूंढता निशान

Vishal YadavVishal Yadav November 30, 2022
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ढूंढता निशान मैं उस
हसीं चमन का
सींचा था बागबाँ ने गुल
जो वतन का।

खोया है जोश , है आभूषण
जो यौवन का
कैसे सांस ले कि , जब
माहौल है दमन का
 
      विशाल"बेफिक्र"

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