पाजेब's image
Share0 Bookmarks 12 Reads0 Likes

पाजेब प्रेम की जो खनक जाऐं कहीं।

छनछन में उसकी मन भटक जाएें कहीं।


निगाहें बचाता रहा मैं निगाहों से उसकी, 

निगाहें ही तो है जाकर अटक जाऐं वहीं।


जब वो करती है जुल्फों से अठखेलिया,

कोई बादल आवारा-सा बहक जाऐं कहीं।


चांदनी में चांद जब देखता है चाँद दूसरा, 

गुरूर चांद का भी आसमान से टपक जाऐं कहीं।


उस शौक अदा़ से जरा कोई तो कह दो, 

लगकर गले मेरे बाहों में मेरी सिमट जाऐं कहीं।।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts