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Kumar VishwasPoetry1 min read

मुस्कराते चेहरे पर अश्रु इक फिसल पड़ा

Vishal SharmaVishal Sharma October 16, 2021
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 मंद-मंद शीतल पवन।

 शांत-शांत चंचल मन।

 दिन-भर सब अच्छा चल रहा था।

 सांझ को फिर सूरज ढल रहा था ।

 मैं फिर तेरी यादों के जानिब चल पड़ा।

 मुस्कराते चेहरे पर अश्रु इक फिसल पड़ा।।


 नैन-नैन बरसे।

 रैन-रैन बरसे।

 मैं फिर दरिया किनारे बढ़ रहा था ।

 इक उम्मीद के सहारे बढ़ रहा था ।

 देख के मुझको समन्दर भी मचल पड़ा।

 मुस्कराते चेहरे पर अश्रु इक फिसल पड़ा।।


 गली-गली, शहर-शहर।

  जर्रा-जर्रा, दर-ब-दर ।

 जहाँ-जहाँ से तेरी खुशबू आ रही थी।

 हम साथ भी चले थे कभी बता रही थी।

 तू आया ना, तेरी चौखट पे मेरा दम निकल पड़ा।

 मुस्कराते चेहरे पर अश्रु इक फिसल पड़ा ।।


दूर-दूर तू ना था।

इतना तो मगरूर तू ना था।

तुझसे पहले तेरी सौत आ गई ।

मुझसे मिलने मेरी मौत आ गई ।

मैं भी सुकुन से सो उसके साथ चल पड़ा।

मुस्कराते चेहरे पर अश्रु इक फिसल पड़ा।।

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