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Kumar VishwasPoetry2 min read

कोई बिछड़ा यार मिलायें

Vishal SharmaVishal Sharma March 29, 2022
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जग जग नैन भीतर धंसे पर साजन न आये।

दिल कली रही कुमलाय काहे सावन न आये।

चलनी काढ़े ताकू चाँद मैं,

दिन सुहागन वाले पिया पानी पिलावन न आये।


लाख दुआयें दूँगी, दिल से सदाये दूँगी,

सर रखूँगी उसको उठाये।

पिया मोरा ढूँढ के लायें।

कोई बिछड़ा यार मिलायें।।


पिया याद में जिया में आग लगे।

बिन माली सूना अब बाग लगे।

साजन न हो जब सम्मुख नेनन के,

अंधेरी दिवाली, बेरंग फाग लगे।

रस्ते में पलके बिछायें दूँगी, काँटे सारे हटायें दूँगी,

रखूँगी नैन दीप जलायें।

पिया मोरा जब घर आयें।

कोई बिछड़ा यार मिलायें।।


प्रीती श्याम ये तेरी कैसी।

आने में इतनी देरी कैसी।

कहाँ खो गया तू बनवारी,

हालत देख है मेरी कैसी।

खुदको अब सजायें दूँगी, जीवन ज्योत मिटायें दूँगी,

तुझे याद न मेरी आये।

काहें अखियन को रूलायें।

कोई बिछड़ा यार मिलायें।।


सैया आ गये सब सखियन के।

तुम न आये, हो गये सौतन के।

जानी जाती क्यूँ नहीं मेरी पीड़ा,

तुम तो हो न जानी सब मन के।

माखन रोज खिलायें दूँगी, सौतन की याद मिटायें दूँगी,

रखूँगी सारे जग से छिपायें।

कभी तो पिया मिलने आयें।

कोई बिछड़ा यार मिलायें।।



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