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Kumar VishwasPoetry1 min read

गरीब थे जो आश़िक गुमनाम हो गये

Vishal SharmaVishal Sharma February 9, 2022
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फलसफे ज़िंदगी के तमाम हो गये।

आये थे काम से पर बेकाम हो गये।

अमीरों ने बना दिये ताजमहल,

गरीब थे जो आश़िक गुमनाम हो गये।


वो देर से देख रहे थे हमको,

हमने जो देखा तो कत्लेआम हो गये।


मुहोब्बत छोड़ दी तब हमने,

जब खत उनके गैर के नाम हो गये।


जिसको पेटियाँ भरनी थी वो राजा बना,

हमें पेट भरना था हम आवाम हो गये।


चोरी की मुहब्बत का मजा अलग था,

मजा चला गया जब सरेआम हो गये।

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