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Kumar VishwasPoetry1 min read

एक सन्नाटा-सा दिल में पसरा है

Vishal SharmaVishal Sharma October 4, 2021
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एक सन्नाटा-सा दिल में पसरा है।

वो शख्स कल ही मुझसे बिछडा है।

जाना उसका घाव कर गया सीने में, 

दिल मेरा कितने टुकड़ों में बिखरा हैं।।


हाथ तो थामा था कसकर मैंने उसका,

फिर कैसे वो हाथों से हाथ फिसला हैं।


मैं मुस्कुराहट लिए बैठा था चेहरे पर,

चश्मों से दरिया अश्कों का बह निकला है।


कब काला हुआ कनक अग्नि-लपटों में,

कनक-सा ही गम मेरा पिघला, निखरा हैं।


अंजाम-ए-मुहब्बत से वाकिफ जमाना है,

फिर भी मुहब्बत जानिब जमाना करता है।

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