सफर में हम।'s image
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थकता कहाँ मन मुसाफ़िर, हौसले भी कम न होते।

नज़रों से ओझल, कभी मंजिल के परचम न होते।

ख्वाहिशें जगाती ही रही, पर सपनों में हम न होते।

कुछ इस तरह जिंदगी, अब आँख भी नम न होते।

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