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जो है‌ अंतर्मन उसे भी पुकारा करो

Vishal ShandilyaVishal Shandilya July 24, 2022
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ज़ख्मों को दो कुछ पल खुली हवा।

दर्द भी अब चाहती कोई नई दुआ।

जो है‌ अंतर्मन उसे भी पुकारा करो।

कुछ वक्त साथ उसके गुजारा करो।

सपनों पर हों जो छाए बादल बहुत।

उम्मीद का नुतन कल संवारा करो।

लिए मुस्कान करते रहो सफर तुम।

इन आंखों से अब कुछ प्यारा करो।

खामोश चेहरे को कहने दो ये बातें।

खुदी को दिल से कुछ दुबारा कहो।

रोक कर मन की आंधियों को तुम।

लम्हों में अब ज़िन्दगी गुजारा करो।

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