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Kumar VishwasPoetry1 min read

अभी उम्र गुजरी कहांँ है।

Vishal ShandilyaVishal Shandilya November 5, 2022
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दे दो इन हाथों में अब तुम अपना हाथ।

जी लेने दो हमें इस बहती हवा के साथ।

इन सूनी आंखों में लिए सपनों का साथ।

ठहरने दो कुछ पल के लिए वक्त आज।

कदम ये हमारे जब रुक जाएं बीच राह।

ढूंढ़ लाना तब तुम मेरी सांसों संग चाह।

बहे जो प्रेम धारा ख्वाहिशों को जीने दो।

अभी हमारी तुम्हारी उम्र गुजरी कहांँ है।

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