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इजाज़त नहीं है

Virag DhuliaVirag Dhulia December 5, 2021
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इजाज़त नहीं है


इजाज़त नहीं है

कि हम अपने दिल से बग़ावत कर सकें,

इजाज़त नहीं है

कि हम अपने ख़्वाबों की ख़िलाफ़त कर सकें,

एक ही तो खैरखां है अपना

वरना कौन अपनी यहां हिफाज़त कर सके,

इजाज़त नहीं है

कि ज़माने की खातिर इसकी शहादत कर सकें।


इजाज़त नहीं है

कि समझौता अपने उसूलों से खामखां कर सकें,

इजाज़त नहीं है

कि बेवजह अपने अरमानों को रूसवा कर सकें,

एक ही तो रहगुजर है अपनी

जहां अपनी अनकही को बेझिझक बयां कर सकें,

इजाज़त नहीं है

कि अपनी ही दवा के ऐवज में दुआ कर सकें।


इजाज़त नहीं है

कि हस्ती अपनी फ़ना ये दिवाना कर सके,

इजाज़त नहीं है

कि खुदी को हकीक़त से बेगाना कर सके,

एक ही तो कारवां है अपना

जिसे बा-हक अपनी आवारगी का ठिकाना कर सके,

इजाज़त नहीं हैै

कि फ़क्त ख़्वाहिशों के दम पर आशियाना कर सकें।


इजाज़त नहीं है

कि हम अपने दिल से बग़ावत कर सकें,

इजाज़त नहीं है

कि हम अपने ख़्वाबों की ख़िलाफ़त कर सकें।

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