विश्वास नहीं है's image
Poetry1 min read

विश्वास नहीं है

Vinit SinghVinit Singh September 29, 2021
Share0 Bookmarks 11 Reads0 Likes

आँखों पर अपनी हमको विश्वास नहीं है

हम रो रहे होंगे लेकिन उदास नहीं हैं


हम नंगे हो गएँ अक्सर सामने उनके

रो कर जो कह दिएँ कि लिबास नहीं है


हमें देख कर रहे हैं वो तलवार अपनी तेज

आगे क्या हो हमको कोई आभास नहीं है


कंधे पे लाद कर हमें चल तो पड़े हैं आप

नींद में हैं आँखें बंद हम कोई लाश नहीं हैं


कमरे को कर दिया है हमने तहस नहस

जबकि किसी भी चीज की तलाश नहीं है


~विनीत सिंह 

Vinit Singh Shayar/poet

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts