मुस्कुराना चाहिए था ghazal by Vinit Singh Shayar's image
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मुस्कुराना चाहिए था ghazal by Vinit Singh Shayar

Vinit SinghVinit Singh June 12, 2022
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मेरे इस चेहरे पे तरस खाना चाहिए था

इक बार हमें भी आज़माना चाहिए था


महफ़िल में जिक्र हुई किसी की हुस्न की

इक बार आपको भी शर्माना चाहिए था


मेरा साथ छोड़ा है ज़माने भर के हकीमों ने

ऐसे में आप को मेरे पास आना चाहिए था


लोग काट लेते हैं ज़िंदगी अज़नबी के सहारे

आपको तो आपके पीछे जमाना चाहिए था


जाने कितनों के दिलों पे राज कर रही हैं आप

हमें तो बस आपके दिल में ठिकाना चाहिए था


आपके लहँगे से तो हमको कोई दिक्कत नहीं

आपको आँखों पे भी काजल लगाना चाहिए था


विनीत तुम को देखकर जो मुस्कुराता है सदा

देख कर उसको तुम्हें भी मुस्कुराना चाहिए था


~विनीत सिंह Vinit Singh Shayar / Shayari




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