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मुस्कुराहटों से मारे गए हैं हम

Vinit SinghVinit Singh November 14, 2021
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फिर उसी राह से पुकारे गए हैं हम

ख़ुद की नज़रों से उतारे गए हैं हम



ख़ून से लिखा था ख़त महबूब को

और फिर दो भाग में फाड़े गए हैं हम


मुमक़िन है वो अंजान रहे लाश से मेरी

न पूछिए अंदर कितना गाड़े गए हैं हम


सबब उदासी की मत हम से पूछिए

किसी की मुस्कुराहटों से मारे गए हैं हम



~विनीत सिंह

Vinit Singh Shayar / shayari

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