किसी दिन (Vinit Singh Shayar, Vinit Singh's Shayari/Poetry)'s image
Love PoetryPoetry1 min read

किसी दिन (Vinit Singh Shayar, Vinit Singh's Shayari/Poetry)

Vinit SinghVinit Singh January 16, 2022
Share0 Bookmarks 528 Reads0 Likes

सरेआम हक़ उन पे जताना है किसी दिन

उनको यह बात बताना है किसी दिन


ऑंखों के इशारे तो हम ने देखे हैं बहुत

हिजाब चेहरे से हटाना है किसी दिन


"इक आप ही नहीं इस दिल में और भी हैं"

बात ये कह कह के सताना है किसी दिन


साँस ये रहती है जब तक आप ही के हैं

फिर हाथ छुड़ा कर चलें जाना है किसी दिन


कभी तो यूँ है कि आप खुद से भी अलग हुएँ

फिर साथ आपके जमाना है किसी दिन


मुफ़लिसी हमारी देख कर जो छोड़ गए हैं

वो लौट आए इतना कमाना है किसी दिन


~विनीत सिंह

Vinit Singh ShayarVinit Singh's Shayari/poetry




No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts