ख़ूब समझते हैं ghazal by Vinit Singh Shayar's image
Romantic PoetryPoetry1 min read

ख़ूब समझते हैं ghazal by Vinit Singh Shayar

Vinit SinghVinit Singh May 11, 2022
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आपका वादा हम ख़ूब समझते हैं

रब का इरादा हम ख़ूब समझते हैं


छोड़ देगा साथ वो भी मंजिल से पहले

जिसको हम अपना महबूब समझते हैं


जवाब उनको अब तो हम देने से रहें

वो हैं कि हम को मजबूर समझते हैं


साक़ी ने आज पूछा है उनसे उनका नाम

वो जो ख़ुदको बड़ा मशहूर समझते हैं


रखती हूँ फोन मुझको मम्मी बुला रही है

बहाना आपका ये हम ख़ूब समझते हैं


~विनीत सिंह

VINIT SINGH SHAYAR

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