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काँपते होठों की फ़रियाद

Vinit SinghVinit Singh April 6, 2022
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बरसात की वो रात हमें याद नहीं है

आख़िरी मुलाक़ात हमें याद नहीं है


भीग रहें थे गले लग कर जहाँ हम दोनो

और फिर उसके बाद हमें याद नहीं है


हाथ उठाया था दुआ में अपनी ख़ातिर

काँपते होठों की फ़रियाद हमें याद नहीं है


जाम तक हुआ नहीं हिजरत में मेरे नसीब

कितने बुरे थे मेरे हालत हमें याद नहीं है


कुछ तो कहें थे वो अलविदा के बाद भी

छोड़िए वो पुरानी बात हमें याद नहीं है


~विनीत सिंह Vinit Singh Shayar

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