दिन गुज़रा मेरा अक्सर जिनकी गुलामी में's image
Poetry1 min read

दिन गुज़रा मेरा अक्सर जिनकी गुलामी में

Vinit SinghVinit Singh April 2, 2022
Share0 Bookmarks 74 Reads0 Likes

दर्द भरा गीत यहाँ गाया जा सकता है

इस मौसम में गुनगुनाया जा सकता है


आज़मा कर हमें वो कहते हैं बज़्म में

और इक बार तुम्हें आज़माया जा सकता है


जिन्हें सुनना है दर्द मेरा ठहरे रात बाक़ी है

जिनको है ज़रूरी काम वो जा सकता है


अब कहीं जा के हुआ पूरा मतलब उनका

अब वो कभी भी मुझे छोड़ के जा सकता है


दिन गुज़रा मेरा अक्सर जिनकी गुलामी में

साम होते ही बोल रहे हैं अब तू जा सकता है


उनकी गलियों से गुज़रने में ख़तरा है बहुत

"विनीत" सब सो रहे हैं अब तू जा सकता है

~विनीत सिंह


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts