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हाल ना पूछो दिल-ए-बेक़रार का...

Vikash RanjanVikash Ranjan January 26, 2023
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हाल ना पूछो दिल-ए-बेक़रार का

पूछ लीजिए क़िस्सा इज़हार का

दिल लगाया है दिल की रानी से,

ग़ज़ब ढा गया मुस्कुराना दिलदार का


कल शाम कदम रखा जो उनकी गलियों में,

ख़ुशबू से भीग गया मोहब्बत-ए-यार का

मिली नज़र जब नज़र से उनकी,

खिल गया चेहरा दिल-ए-बीमार का


खो गया मैं उनकी झील सी आँखों में यूँ

कि भूल गया बातें जीत की और हार का

पास गए, सीने से लगाया और धीरे से कहा,

क्या हाल है मेरे सनम मेरे दिलदार का

मैं तो खूब तड़पता हूँ तुझसे मिलने को,

क्या तुझे याद नहीं आती इस दिल-ए-बेक़रार का


कहने लगी___


जनाब, इश्क़ में उदास रहना भी ज़रूरी होता है

कभी-कभी तड़पना भी ज़रूरी होता है

बाहों में भर कर तो जन्नत मिल ही जाती है

ना मिलने पर दिलों का ज़ोर से धड़कना भी ज़रूरी होता है


सुन कर अल्हड़्पन भरी ये बातें उनकी

मैंने कहा, वरना मज़ा किरकिरा नहीं हो जाएगा प्यार का ?


- विकाश रंजन

मुस्कुराते रहें, स्वस्थ रहें!

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