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विश्वास की डोरी

Vikas Sharma'Shivaaya'Vikas Sharma'Shivaaya' October 3, 2021
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ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते-अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।


ॐ कालभैरवाय नम:। ॐ भयहरणं च भैरव:। ॐ ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं। ॐ भ्रं कालभैरवाय फट्। 


विश्वास की डोरी टूटे न दरबार तुम्हारा छुटे न-चमत्कार कुछ ऐसा करो के बेटा तुझसे रूठे ना 


तेरी मेरी प्रीत पुरनी याद है या फिर भूल चुके-या बाबा आँखों में तुम्हारे बन कर के शूल चुभे-तूने लिखी थी किस्मत जो किसी और के हाथो टूटे ना- चमत्कार कुछ ऐसा करो के बेटा तुझसे रूठे ना 


सदा ही रखा मान मेरा हर वक़्त हर घडी पग पग में-बन के लहू तेरी भगती संवारा बेहती थी मेरे रग रग में-तेरी किरपा से भरा जो गागर किसी भी कारण फूटे ना-चमत्कार कुछ ऐसा करो के बेटा तुझसे रूठे ना 


मान लिया सब गलती मेरी मैं नालायक बेटा हूँ -हाथ पकड़ के हाथ न छोड़ो माना सिक्का खोटा हूँ -तूने दिया है विकास को जो कुछ और कोई इसे लुटे ना -चमत्कार कुछ ऐसा करो के बेटा तुझसे रूठे ना 


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