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राम गरीबों के धन

Vikas Sharma'Shivaaya'Vikas Sharma'Shivaaya' October 28, 2021
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देवगुरू बृहस्‍पति का पवित्र मंत्र:

ऊं अंशगिरसाय विद्महे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नो जीव: प्रचोदयात्।


हमारे निर्धन के धन राम-चोर न लेत, घटत नहि कबहूॅ, आवत गढैं काम।

जल नहिं बूडत, अगिनि न दाहत है ऐसौ हरि नाम-बैकुंठ नाम सकल सुख-दाता, सूरदास-सुख-धाम।। “


सूरदास जी कहते हैं कि राम गरीबों के धन हैं- राम के रूप में यह धन ऐसा है कि चोर इसे चुरा नहीं सकते, पैसा खर्च करने पर कम हो जाता है, लेकिन राम के रूप में पैसा खर्च करने पर यह कभी नहीं घटता। यह पैसा आपत्ति या परेशानी की स्थिति में उपयोगी है। यह देव-रूपी धन न तो पाली में डूबता है और न ही आग में जलता है। यानी यह हर हाल में सुरक्षित है। सूरदास जी कहते हैं कि हे बैकुंठ के स्वामी भगवान! आप सभी सुख देने वाले हैं और मेरे लिए आप सुखों के भंडार हैं, यानी मैं आपके धन से पूरी तरह खुश और संतुष्ट हूं।


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