राधाकृष्ण's image
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ऊं बृं बृहस्पतये नम:


“बूझत स्याम कौन तू गोरी-कहां रहति काकी है बेटी देखी नहीं कहूं ब्रज खोरी॥

काहे को हम ब्रजतन आवतिं खेलति रहहिं आपनी पौरी-सुनत रहति स्त्रवननि नंद ढोटा करत फिरत माखन दधि चोरी॥

तुम्हरो कहा चोरि हम लैहैं खेलन चलौ संग मिलि जोरी-सूरदास प्रभु रसिक सिरोमनि बातनि भुरइ राधिका भोरी॥ “


जब श्री कृष्ण पहली बार राधा जी से मिले, तो उन्होंने राधा जी से पूछा, हे गोरी-आप कौन हैं, आप कहा रहती हैं, किसकी बेटी है, मैंने आपको इससे पहले ब्रज की गलियों में कभी नहीं देखा। तुम इस ब्रज में क्यों आई, अपने ही घर के आंगन में खेलती? यह सुनकर, राधा ने कहा, मैं सुनी थी कि नंदजी का लड़का माखन चोरी करता है। तब कृष्ण ने बात बदलते हुए कहा, लेकिन हम आपसे क्या चुराएंगे। ठीक है, हम दोनों साथ खेलते हैं। सूरदास कहते हैं कि इस तरह कृष्ण ने राधा को उन्हीं बातों में गुमराह किया।


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