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मोतियों की माला

Vikas Sharma'Shivaaya'Vikas Sharma'Shivaaya' November 6, 2021
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'दुर्गम काज जगत के जेते

 सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।' 

कठिन कार्यों की सफलता के लिए।

 

ऊं कृष्णांगाय विद्महे रविपुत्राय धीमहि तन्न: सौरि: प्रचोदयात


रूठे सुजन मनाइए-जो रूठे सौ बार

रहिमन फिरि फिरि पोइए- टूटे मुक्ता हार.


रहीम कहते हैं की यदि आपका प्रिय सौ बार भी रूठे -तो भी रूठे हुए प्रिय को मनाना चाहिए,क्योंकि यदि मोतियों की माला टूट जाए तो उन मोतियों को बार बार धागे में पिरो लेना चाहिए...


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