ज्योत से ज्योत's image
Poetry2 min read

ज्योत से ज्योत

Vikas Sharma'Shivaaya'Vikas Sharma'Shivaaya' October 2, 2021
Share0 Bookmarks 5 Reads0 Likes

शनि देव भगवान सूर्य के पुत्र है -शनि देव को जज माना जाता है- मनुष्य के अछे बुरे काम का फल शनिदेव ही देते है-अपराध सहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया-दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर-गतं पापं गतं दु:खं गतं दारिद्रय मेव च-आगता: सुख-संपत्ति पुण्योऽहं तव दर्शनात्।।


ॐ दक्षिणमुखाय पच्चमुख हनुमते करालबदनाय-


ज्योत से ज्योत जगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो-राह में आए जो दीन दुखी, सबको गले से लगाते चलो


जिसका न कोई संगी साथी ईश्वर है रखवाला-जो निर्धन है जो निर्बल है वह है प्रभू का प्यारा-प्यार के मोती लुटाते चलो, प्रेम की गंगा...


आशा टूटी ममता रूठी छूट गया है किनारा-बंद करो मत द्वार दया का दे दो कुछ तो सहारा-दीप दया का जलाते चलो, प्रेम की गंगा...


छाई है छाओं और अंधेरा भटक गई हैं दिशाएं-मानव बन बैठा है दानव किसको व्यथा सुनाएं-धरती को स्वर्ग बनाते चलो, प्रेम की गंगा...


ज्योत से ज्योत जगाते चलो प्रेम की गंगा बहाते चलो-राह में आए जो दीन दुखी सब को गले से लगाते चलो-प्रेम की गंगा बहाते चलो ...

कौन है ऊँचा कौन है नीचा सब में वो ही समाया-भेद भाव के झूठे भरम में ये मानव भरमाया-धर्म ध्वजा फहराते चलो, प्रेम की गंगा ...


सारे जग के कण कण में है दिव्य अमर इक आत्मा-एक ब्रह्म है एक सत्य है एक ही है परमात्मा-प्राणों से प्राण मिलाते चलो, प्रेम की गंगा ..


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts