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प्रेम एक भाव है जो हमेशा ज़िंदा रहता है

आप शायद भूल भी जाओ

प्रेम आपको भूलने नहीं देता

आप याद करते हो उसको

कभी उसके दिए प्यार के लिए

कभी उसकी की गलतियों के लिए


वो प्रेम ही है कहीं दिल के किसी कमरे में बचा रह जाता है

जैसे एक चिंगारी बुझी आग में दबी रह जाती है

ऐसे ही प्रेम भी अपने आप को बचा लेता है

आपकी हर एक भावना को मुँह चिढ़ा कर 


प्रेम शायद उस छोटे से कोमल पौधे की तरह है

उस कठोर सी चट्टान के लिए

जो उसके दिल को चीर कर भी अपने पनपने की जगह बना लेता है

प्रेम किसी जगह का मोहताज नहीं

प्रेम वो है जो हर जगह अपनी जगह बना लेता है


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