मुझमें बुराई और खुद में अच्छाई ढूँढते हो  | Happy Dussehra's image
Poetry1 min read

मुझमें बुराई और खुद में अच्छाई ढूँढते हो | Happy Dussehra

Vikas BansalVikas Bansal October 15, 2021
Share0 Bookmarks 100 Reads0 Likes

मुझमें बुराई और खुद में अच्छाई ढूँढते हो

जानता हूँ मैं तुम यहाँ मुझ से बड़े रावण हो


जलाते मुझे बार बार पर मैं मरता नहीं कभी

मेरे ज़िन्दा रहने के तुम्हीं सबसे बड़ा कारण हो


सफल कभी हुए नहीं पर करते प्रयास बार बार

असफलताओं के सबसे बड़े तुम उदाहरण हो


अंदर झांक कर देख सको तो देखो एक बार

तुम ख़ुद किए बैठे १०-१० मुखौटे धारण हो


कई बार जलाया पर फिर भी जला मैं कहाँ

सोचता मैं कैसे तुम्हारी दुविधा का निवारण हो


मैं तो सिर्फ़ और सिर्फ़ भगवान राम से था हारा

मरूँगा उसी से जिसका राम जैसा आचरण हो


ठान लो बस गुण कुछ राम के तुम्हें धारण हो

रावण मुक्त हो सब यहाँ पैदा कोई न रावण हो


दशहरा की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ आपको।


विकास बंसल #विकासवाणी



No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts