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चुपचाप रहे ख़ामोश ख़ामोश

Vikas BansalVikas Bansal September 12, 2022
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चुपचाप रहे ख़ामोश ख़ामोश 

एक बार ज़रा कह के तो देखते 


दर बदर की खा रहे हैं ठोकरें वो 

मेरे दिल में ज़रा रह के तो देखते 


सब ग़म भूला सकता था उनको 

मेरी आँखों से ज़रा बह के तो देखते 


क्या हुआ साथ कुछ भी तो नहीं 

मेरी तरह ज़रा सह के तो देखते 


क्या मिल गया लड़ कर हमसे 

दाँवपेंच ज़रा मेरी सुलह के तो देखते 


सच्चे हो ही जाते हैं जो शिद्दत हो 

ख़्वाब मेरी तरह सुबह के तो देखते 


माना मतलब बहुत बड़ा होता है 

रिश्ते बेमतलब, बेवजह के तो देखते 

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