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कविता-: अलबेली रात

mayank chaturvedimayank chaturvedi September 21, 2022
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कल रात मुझे एक सपना आया| 
सपने ने मुझे खुब हिलाया| 
ईश्वर ने उसको सच कर दिखाया| 
आँख खुली तो याद दिलाया| 
ईश्वर ने कठोर सत्य बताया| 
वानर को बुद्धिमान बताया| 
शातिर चोर की तरह वो आया| 
उसने मेरा पेकैट चुराया| 
पेकैट को खाते देख न पाया| 
दुख और दर्द ने खुब सताया| 
आँख खुली तो मुझे याद आया| 
रात ने मुझे खुब तड़पाया| 
यह दिन कुछ सीखाने आया| 

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