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उम्रदराज दोस्ती ke gul***

vijay ranavijay rana November 30, 2021
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उम्र के इस पड़ाव पर अक्सर 

जहां या तो सारे  बाल सफेद होते हैं 

या होते ही नहीं 

पैर या तो चलते  चलते थक जाते है  

या चलते ही नहीं 


मग़र जाने क्या जादू  करती है 

दोस्तों की ये महफिल 

कि बिना किसी बात के भी सब

हंसते हंसते थकते ही नहीं 


हंसते हंसते करते हैं बीमारियों के चर्चे

इलाज और सारी दवाइयां भी पता है इन्हें

इनकी महफिल में बैठो तो लगता है 

जिंदगी में और कुछ जरूरतें ही नहीं 


ऐसा या तो मोहब्बत में होता है

या फिर उम्र दराज इस दोस्ती में

कि बिना बात अकेले में भी

मुस्कुराते थकते ही नहीं 


बात बात पर मिलते हैं गले

और बिना बात देते हैं गाली भी

बात बात पर पड़ते हैं गले

और गले मिलते हैं तो छोड़ते ही नहीं


ऐसा नहीं कि इन्हें अपनों से कम मोहब्बत है

ऐसा भी नहीं कि इन्हें और कुछ भाता नहीं

मगर दोस्तों में खुल कर बोलते हैं

और दूसरों को कुछ बोलते ही नहीं 


लौटकर आया है बचपन इनका

इनको इनके हाल पे छोड़ना बेहतर

सिर्फ दोस्त ही संभाल सकते हैं इन्हें

किसी और से ये संभलते भी नहीं




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