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कैसे उन्हें बताऊं मैं दर्द कहां से लाता हूं....

vijay ranavijay rana September 11, 2021
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 वो पूछते हैं  गीतों में सब दर्द कहाँ से लाता हूँ 

 कैसे उन्हें बताऊं उनका ही दर्द उन्हें सुनाता हूँ


उनसे चुराए लम्हों से कोई नज़्म बना लेता हूँँ मैं

उनके तमाम गम थोड़ी खुशियों में पिरो देता हूं 

 

कुछ ख्वाब हैं उनके,कुछ अपने संजो लेता हूँ।

किस्से कुछ सच्चे,कुछ सपने बयां कर देता हूं


दुनिया के जज़्बातों से कोई दास्तां चुराता हूँ मैं

दुनिया की कहानी है जो दुनिया को सुनाता हूं 


मेरी दास्तान-ऐ-दर्द में वो खुद का अक्स पाते हैं

उसे मेरा दर्द समझ अक्सर अपना भूल जाते हैं




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