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जिंदगी की कश्मकश...

vijay ranavijay rana January 4, 2022
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जिंदगी की कश्मकश बहुत संगदिल है ज़नाब
प्यार और दुश्मनी में थोड़ा ही फासला है यहां

जिंदगी के सौदे यहां मुश्किल भी हैं महंगे भी
दरिया ए गम में डूबकर ही मिलती हैं खुशियां यहां

पलक झपकते हवाएं बदल देती हैं रुख अपना 
प्यार यूं ही चुटकियों में बीमार हो जाते हैं यहां

जुनूने इश्क़ आज का ,कल कब दुस्वार हो जाए
किसीको कानों कान भी खबर नहीं लगती यहां

प्यार पाना नहीं उसे संभालना है बड़ा मुश्किल
हर प्यार के हर रोज़ नित नए नखरे होते हैं यहां

किसी की उम्मीदों पर खरा उतरना है मुश्किल
प्यार को जिंदा रखना भी बड़ा मुश्किल है यहां

हुजूर अपने प्यार को प्यार से गले लगाए रखिए
प्यार की पौध को प्यार से सींचना पड़ता है यहां




 

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