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जय गुरुदेव.....

vijay ranavijay rana April 6, 2022
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हे श्रद्धेय, तुम प्रेरक भी, प्रेरणा और  कथानक  भी

हर पल आपके चरणों में झुका शीश करते हैं नमन


गदगद है,संतृप्त है मन,पाकर ये आशीष आपका

आज आपके चरणों से, धन्य हुआ मन का आंगन


आपकी आंखों में, करुणा का महासागर है गुरुवर

प्रेम छलकता है झरझर, जब भी आप उठाएं नयन


घुलता है शहद कानों में, बहती है अविरल अश्रु धारा

जब भी वाणी मधुर आपकी, भिगो जाती है ये तन मन 


आपके दर्शन से बढ़कर, नहीं कोई भी धन गुरुवर

गुरुदेव आपके आने से खिल उठता  है सारा चमन


प्रेम, करुणा और दया से जीता है आपने जग सारा 

आशीष हमें दो हे गुरुवर, हम भी लहराएं ये परचम










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