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एक उम्मीद का दीया

कहता है क्या सुनों ज़रा,

जलता रहूँगा मैं तब तक

अंत ना हो जाए अंधकार का जब तक,

आएँगी मुशिकल भरी हवाएँ भी बहुत 

सामना करूँगा का उनका मैं लेकिन

तेल की आखिरी बूँद तक ।


©️Vibha Jain

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