लहर's image
Share0 Bookmarks 15 Reads0 Likes


रात गुजर रही मेरे साथ

चहुँओर दिखा राख – सी चित्र

मानो दे रहा कोई संदेश

प्रत्याशा है जैसे झींगुर राग घट के


दिशा – दिशा तिरती पवनें

मन्द – मन्द या तेज उठान वेग

सुख – दुःख की क्या खींचती व्यथाएँ ?

बढ़ – बढ़ लौटती आँगन की जैसी छाया !


ऊपर शशि केतन ले किंचित् प्रभा

कहाँ दे रही मुख के मुस्कान ?

माहुर भव या मनु कौतुक दंभ भरा

कहर उठा चितवन , है यह लहर किसका ?


यह अवसाद है पुराना झर रही जैसी

आँशू गिर – गिर कर बह चली सरित्

इस खल महफ़िल के बैठी चिंगारी

कहाँ खींचती किसी की लकीर ?


सन्ध्या नूपुर – सी झिन – झिन करती

बढ़ असित मन्द – मन्द कौमुदी नीहार

क्षणभंगुर यह पुलिन है ख़ग के कलरव

गति है वेग में त्वरित छवि विवस्वान् के

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts