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अग्नि में दिये

Varun Singh GautamVarun Singh Gautam January 17, 2022
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कब जलेंगे आँगन में दीपक

खूबसूरत लगेंगे यें कितना

अग्नि में दिये , दिये में बाती

चलें चलों खुशियां के घर में

प्रेम बन्धन का दीप जलाएँ

रोशनी की दुनिया कौन जाने ?

यें अंधेरे की दिवाले से जाकर पूछो

क्या ! रोशनी नहीं लगती प्यारी तुझे

अपनी पर को पर नहीं होने दो‌ न

सारे भव में तस्वीर रच दो न

चित्र – चित्र में क्या छिपा यें गति ?

यें भी चल है तुम कब हो रहें चल

इतिवृत्त भी है दास्तां के धरोहरों में

कितने और क्यों हैं गुमान तेरे

क्या सार की प्रकृति नहीं दिखती तुझे ?

तू मनु स्वयं के वश में क्यों हो ?

बाती की जलती तस्वीर देखो

कैसी है इसकी धू – धू भींगी लौह ?

क्यों हो गयी कब से पुरानी ?

यें मिटी पर के पर के लिए

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